Wednesday, March 17, 2010

कल दो पुलिसवालों को सरेआम मर के दो कैदियों को छुड़ा लिया गया। न कोई आवाज उठी न कहीं शोर हुआ। जी दोस्तों आज वही मीडिया शांत है जो कभी पुलिस के हाथ में डंडा लिए कभी किसी को थप्पड़ मरते हुए फोटो निकालती है। कुछ दिनों पहले पुलिस की पिटाई से दो क्रिमिनल्स मरे गए थे तब इसी मीडिया ने पुलिस को हत्यारा, शैतान जाने क्या क्या कहा था आज फिर क्यों इतनी ख़ामोश................. दो पुलिस वाले कल मर गए उनका भी घर होगा बच्चे होंगे पर आपको क्या फ़र्क पड़ता है जब पुलिस की पिटाई से कोई क्रिमिनल मरता है तब आपको विषय मिलता है दुनिया की सहानुभूति पाने के लिए जरा सोचिए अगेर कल ये पुलिस बदमाशों से चोरों से प्यार से बात करेगी तो क्या होगा ........आप खुद ही समझदार हैं
आये दिन अगर पेपर में सिर्फ पुलिस की शिकायत ही निकालेंगे तो क्या पुलिस हतोत्साहित नहीं होगी। रात दिन बिना ठण्ड या गरम की परवाह किये अपने परिवार से दूर मानसिक परेशानियों के साथ काम करने वालों को ऐसी सजा to मत दीजिये। सोचिये अगर एक दिन के लिए ये पुलिस घर बैठ जाये तब क्या होगा। समाज है तो अछे और बुरे दोनों तरह के लोग होंगे उसकेलिए पूरी पुलिस फोर्स को गलत नहीं ठहरा सकते अगर
हमने पुलिस को सजा देना बंद नहीं किया तो paridam ghatek ho sakte hain......................